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अंतिम कार्य

एक बूढ़ा कारपेंटर अपने काम के लिए काफी जाना जाता था। उसके बनाये लकड़ी के घर दूर -दूर तक प्रसिद्द थे।  लेकिन अब बूढा हो जाने के कारण उसने सोचा कि बाकी की ज़िन्दगी आराम से गुजारी जाए और वह अगले दिन सुबह-सुबह अपने मालिक के पास पहुंचा।   वह बोला , "ठेकेदार साहब , मैंने बरसों आपकी सेवा की है पर अब मैं बाकी का समय आराम से पूजा-पाठ में बिताना चाहता हूँ , कृपया मुझे काम छोड़ने की अनुमति दें ।" ठेकेदार कारपेंटर को बहुत मानता था , इसलिए उसे ये सुनकर थोडा दुःख हुआ पर वो कारपेंटर को निराश नहीं करना चाहता था। उसने कहा , ” आप यहाँ के सबसे अनुभवी व्यक्ति हैं , आपकी कमी यहाँ कोई नहीं पूरी कर पायेगा लेकिन मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि जाने से पहले एक आखिरी काम करते जाइये .” “जी , क्या काम करना है ?”  कारपेंटर ने पूछा “मैं चाहता हूँ कि आप जाते -जाते हमारे लिए एक और लकड़ी का घर तैयार कर दीजिये .” , ठेकेदार घर बनाने के लिए ज़रूरी पैसे देते हुए बोला। कारपेंटर इस काम के लिए तैयार हो गया . उसने अगले दिन से ही घर बनाना शुरू कर दिया , पर ये जान कर कि ये उसका आखिरी काम है और इसके बाद उसे और कुछ...

घमंड | बच्चों के लिए कहानी

एक गावँ के बहार एक पीपल का पेड़ था। गांव में थोड़ी दूरी पर एक पेड़ के पास एक कुआँ था। वह कुआँ बहुत पुराना और गहरा था।  कुआँ मे जहाँ पानी था वहाँ रौशनी बहुत कम थी। उस कुएं के गहरे पानी मे मीकू और चीकू नाम के दो मेढक रहते थे। वे पानी मे टांग फैलाकर हमेशा तैरते रहते थे , तैरना उनको बहुत अच्छा लगता था। बैठेने की कोई जगह भी तो नहीं थी, जहाँ पर वे बैठ कर कुछ कर सके । पानी की सतह से ऊपर कुआँ की दीवार पर एक गढ्ढा था, उसमे चुनमुन नाम की एक चिड़िया रहती थी। वहाँ पर उसने अपना एक घोसला बना लिया था। रोज सुबह वह दान चुगने बहार चली जाती थी , वहाँ दूसरे पंछियो से बात करती और शाम को अपने घोसले मे वापस आ जाती थी। चुनमुन अक्सर मीकू और चीकू का हाल पूछ लिया करती थी। मीकू और चीकू बहुत ही घमंडी थे , दोनों मे हमेसा छलांग लगाने की होड़ लगी रहती थी। एक बार चुनमुन दूर लहलहाते फसलो की प्रसंसा करने लगा , उसने उन दोनों को बताया की बहार की दुनिया बहुत ही बड़ी है। यह सुनकर वो दोनों जोर – जोर से हँसने लगे। और दोनों ने एक लंबी छलांग लगाकर कहा इससे भी बड़ी है, तो चुनमुन ने कहा हां ,इससे भी बड़ी है। उसकी बात सुन...

दिखावे पड़ता है महंगा |

एक अच्छे कॉलेज की शिक्षा प्राप्त एक युवा नौजवान की बहुत अच्छी नौकरी लग जाती है। उसे कंपनी की और से काम करने के लिए अलग से एक केबिन दे दिया जाता है। वह नौजवान जब पहले दिन office जाता है और बैठ कर अपने शानदार केबिन को निहार रहा होता है।  तभी दरवाजा खट -खटाने की आवाज आती है दरवाजे पर एक साधारण सा व्यक्ति रहता है , पर उसे अंदर आने कहनेँ के बजाय वह युवा व्यक्ति उसे आधा घँटा बाहर इंतजार करनेँ के लिए कहता है।  आधा घँटा बीतनेँ के पश्चात वह आदमी पुन: office के अंदर जानेँ की अनुमति मांगता है, उसे अंदर आते देख युवक टेलीफोन से बात करना शुरु कर देता है।  वह फोन पर बहुत सारे पैसोँ की बातेँ करता है, अपने ऐशो–आराम के बारे मेँ कई प्रकार की डींगें हाँकनेँ लगता है, सामनेँ वाला व्यक्ति उसकी सारी बातेँ सुन रहा होता है, पर वो युवा व्यक्ति फोन पर बड़ी-बड़ी डींगें हांकना जारी रखता है। जब उसकी बातेँ खत्म हो जाती हैँ तब जाकर वह उस साधारण व्यक्ति से पूछता है है कि तुम यहाँ क्या करनेँ आये हो? वह आदमी उस युवा व्यक्ति को विनम्र भाव से देखते हुए कहता है , “साहब, मैँ यहाँ टेलीफोन रिपेयर करनेँ के लिए आया ह...

एक अनोखा दिया

एक घर मे पांच दिए जल रहे थे। एक दिन पहले एक दिए ने कहा – “इतना जलकर भी मेरी रोशनी की लोगो को कोई कदर नही है तो बेहतर यही होगा कि मैं बुझ जाऊं” वह दिया खुद को व्यर्थ समझ कर बुझ गया । जानते है वह दिया कौन था ? वह दिया था “उत्साह”का प्रतीक । यह देख दूसरा दिया जो “शांति” का प्रतीक था, कहने लगा..मुझे भी बुझ जाना चाहिए। निरंतर “शांति की रोशनी” देने के बावजूद भी “लोग हिंसा कर” रहे है। और “शांति” का दिया बुझ गया । “उत्साह” और “शांति” के दिये के बुझने के बाद, जो तीसरा दिया “हिम्मत” का था, वह भी अपनी हिम्मत खो बैठा और बुझ गया। “उत्साह”, “शांति” और अब “हिम्मत” के न रहने पर चौथे दिए ने बुझना ही उचित समझा। “चौथा” दिया “समृद्धि” का प्रतीक था। सभी दिए बुझने के बाद केवल “पांचवां दिया” “अकेला ही जल” रहा था। हालांकि पांचवां दिया सबसे छोटा था मगर फिर भी वह “निरंतर जल रहा था। तब उस घर मे एक “लड़के” ने प्रवेश किया। उसने देखा कि उस घर मे सिर्फ “एक ही दिया” जल रहा है। वह खुशी से झूम उठा।

कौन किसका सेवक

जब कभी दरबार में अकबर और बीरबल अकेले होते थे तो किसी न किसी बात पर बहस छिड़ जाती थी।  एक दिन बादशाह अकबर बैंगन की सब्जी की खूब तारीफ कर रहे थे। बीरबल भी बादशाह की हां में हां मिला रहे थे। इतना ही नहीं, वह अपनी तरफ से भी दो-चार वाक्य बैंगन की तारीफ में कह देते थे। अचानक बादशाह अकबर के दिल में आया कि देखें बीरबल अपनी बात को कहां तक निभाते हैं।  यह सोचकर बादशाह बीरबल के सामने बैंगन की बुराई करने लगे। बीरबल भी उनकी हां में हां मिलाने लगे कि बैंगन खाने से शारीरिक बीमारियाँ हो जाती हैं इत्यादि। बीरबल की बात सुनकर बादशाह अकबर हैरान हो गए और बोले- "बीरबल! तुम्हारी इस बात का यकीन नहीं किया जा सकता। कभी तुम बैंगन की तारीफ करते हो और कभी बुराई करते हो। जब हमने इसकी तारीफ की तो तुमने भी इसकी तारीफ की और जब हमने इसकी बुराई की तो तुमने। भी इसकी बुराई की, आखिर ऐसा क्यों?" बीरबल ने नरम लहजे में कहा- "बादशाह सलामत! मैं तो आपका से सेवक हूं, बैंगन का नहीं"।

बाज और किसान

बहुत समय पहले की बात है , एक राजा को उपहार में किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किये । वे बड़ी ही अच्छी नस्ल के थे , और राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे। राजा ने उनकी देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया। जब कुछ महीने बीत गए तो राजा ने बाजों को देखने का मन बनाया , और उस जगह पहुँच गए जहाँ उन्हें पाला जा रहा था। राजा ने देखा कि दोनों बाज काफी बड़े हो चुके थे और अब पहले से भी शानदार लग रहे थे । राजा ने बाजों की देखभाल कर रहे आदमी से कहा, ” मैं इनकी उड़ान देखना चाहता हूँ , तुम इन्हे उड़ने का इशारा करो । “ आदमी ने ऐसा ही किया। इशारा मिलते ही दोनों बाज उड़ान भरने लगे , पर जहाँ एक बाज आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा था , वहीँ दूसरा , कुछ ऊपर जाकर वापस उसी डाल पर आकर बैठ गया जिससे वो उड़ा था। ये देख , राजा को कुछ अजीब लगा. “क्या बात है जहाँ एक बाज इतनी अच्छी उड़ान भर रहा है वहीँ ये दूसरा बाज उड़ना ही नहीं चाह रहा ?”, राजा ने सवाल किया। ” जी हुजूर , इस बाज के साथ शुरू से यही समस्या है , वो इस डाल को छोड़ता ही नहीं।” राजा को दोनों ही बाज प्रिय थे , और वो दुसरे बाज को भी उसी तरह उड़ना ...

किसान और पंख

एक गांव में एक किसान रहता था। एक दिन उस किसान की अपने पड़ोसी से लड़ाई हो गई। उसने अपने पडोसी को भला बुरा कह दिया और काम पर चला गया। थोड़ी देर बाद काम करते करते हैं उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने अपने मन को कहीं हुए करने की बहुत कोशिश की, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें, तो वह पास के जंगल में एक संत के पास गया।  उसने संत से अपने शब्द वापस लेने का उपाय पूछा। संत ने किसान से कहा , ”तुम खूब सारे पंख इकठ्ठा कर लो , और उन्हें शहर के बीचो-बीच जाकर रख दो”  किसान ने सोचा कि शायद इससे कोई हल निकाल सकता है और उसने ऐसा ही किया।  खूब सारे पंख इकट्ठे किए और उन सबको शहर के बीचो बीच जाकर रख आया और फिर संत के पास पहुंच गया। तब संत ने कहा - ”अब जाओ और उन पंखों को इकठ्ठा कर के वापस ले आओ” किसान वापस गया लेकिन तब तक सारे पंख हवा से इधर-उधर उड़ चुके थे।   किसान खाली हाथ संत के पास पहुंचा। संत ने उससे कहा - "ठीक ऐसा ही तुम्हारे द्वारा कहे गए शब्दों के साथ होता है, तुम आसानी से इन्हें अपने मुख से निकाल तो सकते हो पर चाह कर भी वापस नहीं ले सकत...

खुश रहने का राज | Happiness's Secret

एक समय एक गांव के पास एक पर्वत था। उस पर्वत में एक महान ऋषि रहा करते थे। जब कभी किसी व्यक्ति को कोई समस्या होती थी तो वह व्यक्ति उन ऋषि के पास अपनी समस्या के समाधान के लिए जाते थे। जो लोग उनके पास अपनी कठिनाईयां लेकर आते थे, वह ऋषि उनका मार्गदर्शन करते थे।  एक दिन एक व्यक्ति उन ऋषि के पास आया। ऋषि ने उस व्यक्ति को बैठने के लिए कहा।  नीचे बैठने के बाद उस व्यक्ति ने ऋषि से एक प्रश्न पूछा।  उसने पूछा - “गुरुदेव मैं यह जानना चाहता हुईं कि हमेशा खुश रहने का राज़ क्या है?”  ऋषि ने उस व्यक्ति कि तरफ देखा और उससे कहा - "यहीं पास में जंगल है, तुम मेरे साथ जंगल में चलो, मैं तुम्हे वहीं पर खुश रहने का राज़ बताऊंगा।" ऐसा कहकर ऋषि और वह व्यक्ति जंगल की तरफ चलने लगे।  रास्ते में ऋषि ने एक बड़ा सा पत्थर देखा और उस व्यक्ति को कहा - "इस पत्थर को साथ ले चलो"  उस व्यक्ति ने पत्थर को उठाया और वह ऋषि के साथ साथ जंगल की तरफ चलने लगा वह आगे बढ़ते जा रहे थे। थोड़े समय बाद उस व्यक्ति के हाथ में दर्द होने लगा लेकिन वह चुप रहा और चलता रहा।  परन्तु जब चलते चलते बहुत समय ...

दो सिर वाला पक्षी

एक बार की बात है, एक समय में एक विचित्र पक्षी रहता था। उसका शरीर एक ही था, लेकिन सिर दो थे। एक शरीर होने के बावजूद उसके दोनों सिरों में एकता नहीं थी और न ही तालमेल था।  वे एक दूसरे से बैर रखते थे। हर जीव सोचने समझने का काम दिमाग से करता ही हैं लेकिन दो सिर होने के कारण उसके दिमाग भी दो थे।  दोनों सर में से एक पूरब जाने की सोचता तो दूसरा पश्चिम। और होता यह था कि टांगें एक कदम पूरब की ओर चलती तो अगला कदम पश्चिम की ओर। वह स्वयं को वहीं खडा पाता था। उसका जीवन बस दो सिरों के बीच की लड़ाई बनकर रह गया था। एक दिन वह भोजन की तलाश में नदी तट पर धूम रहा था कि एक सिर को नीचे गिरा एक फल नजर आया। उसने चोंच मारकर उसे चखकर देखा तो जीभ चटकाने लगा “वाह! ऐसा स्वादिष्ट फल तो मैंने आज तक कभी नहीं खाया। भगवान ने दुनिया में क्या-क्या चीजें बनाई हैं।” “अच्छा! जरा मैं भी चखकर देखूं।” कहकर दूसरे ने अपनी चोंच उस फल की ओर बढाई ही थी कि पहले सिर ने झटककर दूसरे सिर को दूर फेंका और बोला “अपनी गंदी चोंच इस फल से दूर ही रख। यह फल मैंने पाया हैं और इसे मैं ही खाऊंगा।” “अरे! हम दोनों का शरीर तो एक ह...

दूध का कुआ

बादशाह अकबर के दरबार की कार्यवाही चल रही थी। सभी दरबारी एक ऐसे प्रश्न पर विचार कर रहे थे जो राज-काज चलाने की दृष्टि से बेहद अहम नहीं था।  सभी एक-एक कर अपनी राय दे रहे थे। बादशाह दरबार में बैठे यह महसूस कर रहे थे कि सबकी राय अलग है। उन्हें आश्चर्य हुआ कि सभी एक जैसे क्यों नहीं सोचते! तब अकबर ने बीरबल से पूछा, “क्या तुम बता सकते हो कि लोगों की राय आपस में मिलती क्यों नहीं ? सब अलग-अलग क्यों सोचते हैं ?” “हमेशा ऐसा नहीं होता, बादशाह सलामत !” बीरबल बोला, “कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं जिन पर सभी के विचार समान होते हैं।”  इसके बाद कुछ और काम निपटा कर दरबार की कार्यवाही समाप्त हो गई। सभी अपने-अपने घरों को लौट चले। उसी शाम जब बीरबल और अकबर बाग में टहल रहे थे तो बादशाह ने फिर वही राग छेड़ दिया और बीरबल से बहस करने लगे। तब बीरबल बाग के ही एक कोने की ओर उंगली से संकेत करता हुआ बोला, “वहां उस पेड़ के निकट एक कुआं है। वहां चलिए, मैं कोशिश करता हूं कि आपको समझा सकूं कि जब कोई समस्या जनता से जुड़ी हो तो सभी एक जैसा ही सोचते हैं। मेरे कहने का मतलब यह है कि बहुत सी ऐसी बातें हैं जिनको...

चार चोरों की कहानी । बुरे का अंत बुरा

किसी जंगल में चार चोर रहते थे। वे चारों मिलकर चोरी किया करते थे। जो भी सामान उनके हाथ लगता था वह उसे आपस में बराबर-बराबर बाँट लेते थे।  वैसे तो वे चारों एक-दूसरे के प्रति प्रेम प्रकट करते थे, किन्तु मन-ही-मन एक-दूसरे से ईर्ष्या करते थे। चारों चोर बहुत ही दुष्ट और स्वार्थी प्रवृत्ति के थे। वे चारों अपने मन में यही सोचते थे कि यदि किसी दिन बड़ी चोरी करेंगे और एक बार मोटा माल मिल जाए तो वह अपने साथियों को मारकर सारा माल हड़प लेगा।  चारों चोर इस ही मौक़े की तलाश में थे। लेकिन उन्हें ऐसा मौका अभी तक नहीं मिला था। एक रात चारों चोर चोरी करने के लिए इधर-उधर घूम रहे थे। उन्होंने एक अमीर सेठ के घर में सेंध लगाई और घर के अन्दर घुसकर हीरे-जवाहरात, सोना-चाँदी, रूपया-पैसा सब कुछ लूटकर भाग गए।  चारों चोर पुलिस से बचने के लिए दो दिन तक जंगल में भूखे-प्यासे भटकते रहे। सेठ ने चोरी की शिकायत पुलिस में दर्ज करा दी थी। सेठ की पुलिस विभाग में भी अच्छी जान-पहचान थी।  चोरों को पकड़ने के लिए शहर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस फैली हुई थी। जंगल से निकलना चोरों के लिए खतरे से खाली नहीं था...

राजू और जादुई माचिस

राजू और चिंकी अच्छे दोस्त थे वह एक ही स्कूल में पढ़ा करते थे। एक दिन स्कूल की छुट्टी हुई। सब बाहर जाने लगे।  राजू परेशान सा दिख रहा था तो चिंकी ने कारण पूछा। राजू ने घबराते हुए बताया - “अगले हफ्ते से एग्जाम हैं, डर लग रहा है।”  यह सुनकर चिंकी हंस पड़ी- “लगता है, तुम एग्जामोफोबिया के शिकार हो गए हो। मंथली टेस्ट में भी तुम ऐसे ही डरे हुए थे। मार्क्स तो अच्छे ही आए थे तुम्हारे। फिर डर कैसा?”  रमेश ने चिढ़ाते हुए कहा, “यह ऐसा ही है। जब कभी हम स्कूल के लिए थोड़ा लेट हो जाते हैं, तब भी यह ऐसा ही घबरा जाता है। इसका कुछ नहीं हो सकता।”  एक के बाद एक सारे दोस्त राजू को चिढ़ाने लगे, तो चिंकी ने बात बदलते हुए कहा, “बहुत हो गया। तुम सब इसे सपोर्ट करने की जगह इसका मजाक उड़ा रहे हो। अच्छे दोस्त ऐसा नहीं करते।”  दूसरे दिन स्कूल में लंच ब्रेक हुआ, तो बच्चे मस्ती करने लगे। राजू चुपचाप एक कोने में अकेला बैठा था। चिंकी ने पूछा, तो राजू ने कहा, “एग्जाम डेट सुनने के बाद से मेरा तो खाने का मन ही नहीं है। मुझे तो आज रात नींद भी नहीं आएगी।”  चिंकी पहले तो मुसकराई, फिर धीरे से बोली,...

सबसे बड़ा गरीब कौन?

एक महात्मा भिक्षु भ्रमण करते हुए नगर में से गुज़र रहे थे। मार्ग में उन्हें एक रुपया मिला।  महात्मा तो विरक्त और संतोषी व्यक्ति थे। वे भला उसका क्या करते?  अतः उन्होंने किसी गरीब या दरिद्र को यह रुपया देने का विचार किया।  वे कई दिन तक तलाश करते रहे लेकिन उन्हें कोई दरिद्र नहीं मिला। एक दिन उन्होंने देखा कि एक राजा अपनी सेना सहित दूसरे राज्य पर चढ़ाई करने जा रहा है।  साधु महात्मा ने वह रुपया राजा के ऊपर फेंक दिया।  इस पर राजा को नाराजगी भी हुई और साथ ही साथ आश्चर्य भी हुआ क्योंकि रुपया एक साधु ने फेंका था। राजा ने साधु से ऐसा करने का कारण पूछा। साधु ने धैर्य के साथ कहा- ‘राजन्! मैंने रास्ते में एक रुपया पाया, उसे किसी दरिद्र को देने का निश्चय किया। लेकिन मुझे तुम्हारे बराबर कोई दरिद्र व्यक्ति नहीं मिला, क्योंकि जो इतने बड़े राज्य का अधिपति होकर भी दूसरे राज्य पर चढ़ाई करने जा रहा हो और इसके लिए युद्ध में अपार संहार करने को उद्यत हो रहा हो, उससे ज्यादा दरिद्र कौन होगा?’ राजा का क्रोध शान्त हुआ और अपनी भूल पर पश्चात्ताप हुआ।  यूज राजा ने अपनी सेना पीछे ली और वा...

बंदरों की भेड़चाल | The monkeys experiment

एक बार कुछ बंदरों को एक बड़े से पिंजरे में डाला गया और वहां पर एक सीढी लगाई गई। सीढी के ऊपरी भाग पर कुछ केले लटका दिए गए। उन केलों को खाने के लिए एक बन्दर सीढी के पास पहुंचा। जैसे ही वह बन्दर सीढी पर चढ़ने लगा, उस पर बहुत सारा ठंडा पानी गिरा दिया गया और उसके साथ-साथ बाकी बंदरों पर भी पानी गिरा दिया गया। पानी डालने पर वह बन्दर भाग कर एक कोने में चला गया। थोड़ी देर बाद एक दूसरा बन्दर सीढी के पास पहुंचा। वह जैसे ही सीढी के ऊपर चढ़ने लगा, फिर से बन्दर पर ठंडा पानी गिरा दिया गया और इसकी सजा बाकि बंदरों को भी मिली और साथ-साथ दूसरे बंदरो पर भी ठंडा पानी गिरा दिया गया। ठन्डे पानी के कारण सारे बन्दर भाग कर एक कोने में चले गए। यह प्रक्रिया चलती रही और जैसे ही कोई बन्दर सीढी पर केले खाने के लिए चढ़ता, उस पर और साथ-साथ बाकि बंदरों को इसकी सजा मिलती और उन पर ठंडा पानी डाल दिया जाता। बहुत बार ठन्डे पानी की सजा मिलने पर बन्दर समझ गए कि अगर कोई भी उस सीढी पर चढ़ने की कोशिश करेगा तो इसकी सजा सभी को मिलेगी और उन सभी पर ठंडा पानी डाल दिया जाएगा। अब जैसे ही कोई बन्दर सीढी के पास जाने की कोशिश करता तो बाकी सारे ...

आत्मविश्वास और निर्भयता

एक बार एक व्यवसायी था जिसका व्यवसाय पूरी तरह से कर्ज से डूब गया था। वह इतनी बुरी हालत में था कि उसका व्यवसाय बंद होने के कगार पर आ गया था।  एक दिन वह बहुत चिंतित व निराश होकर एक बगीचे में बैठा था और सोच रहा था कि काश कोई उसकी कंपनी को बंद होने से बचा ले।   वो ये सब सोच ही रहा था तभी एक बूढ़ा व्यक्ति वहां पर आया और बोला – आप बहुत चिंतित लग रहे है, कृपया अपनी समस्या मुझे बताइये शायद मैं आपकी मदद कर सकूं | व्यवसायी ने उस बूढ़े आदमी कि तरफ देखा और उसको अपनी समस्या बताई। व्यवसायी की समस्या सुनकर बूढ़े व्यक्ति ने अपनी जेब से चेकबुक निकाली और एक चेक लिखकर व्यवसायी को दिया और कहा – तुम यह चेक रखो और ठीक एक वर्ष बाद हम यहाँ फिर मिलेंगे तो तुम मुझे यह पैसे वापस लौटा देना। व्यवसायी ने चेक देखा तो उसकी आँखे फटी रह गयी – उसके हाथों में 50 लाख का चेक था जिस पर उस शहर के सबसे अमीर व्यक्ति जॉन रोकफेलर के साइन थे। उस व्यवसायी को यह विश्वास नहीं हो पा रहा था कि वह बूढ़ा व्यक्ति और कोई नहीं बल्कि उस शहर का सबसे अमीर व्यक्ति जॉन रोकफेलर था। उसने उस बूढ़े व्यक्ति को आस-पास देखा लेकिन वह व्यक्ति वहां स...

एक मनुष्य की कीमत क्या होती है

एक बच्चा अपने पिता के साथ लोहे कि दुकान पर काम करता था। एक दिन उस बच्चे ने अचानक अपने पिता से एक सवाल पुछा – “पिताजी इस दुनिया में मनुष्य की क्या कीमत होती है?” पिता उस बच्चे से ऐसा गंभीर सवाल सुन कर हैरान रह गये। फिर थोड़ी देर बाद बोले - “बेटे एक मनुष्य की कीमत आंकना बहुत मुश्किल है, वो तो अनमोल है.” बालक – क्या सभी मनुष्य इतने ही कीमती और महत्त्वपूर्ण होते हैं? पिता ने जवाब दिया – हाँ बेटे। सभी मनुष्य इतने ही कीमती और महत्त्वपूर्ण होते हैं। बालक कुछ कुछ देर सोचा फिर अपने पिता से एक और सवाल किया – "तो फिर पिताजी इस दुनिया मे कोई गरीब तो कोई अमीर क्यो है?" सवाल सुनकर पिता कुछ देर तक शांत रहे और फिर बच्चे से स्टोर रूम में पड़ा एक लोहे का रॉड लाने को कहा। रॉड लाते ही पिता ने बच्चे से पुछा – " बताओ इसकी क्या कीमत होगी?" बच्चा – पिताजी" इसकी कीमत 200 रूपये तक होगी" पिताजी – "अगर मै इसके बहुत से छोटे-छटे कील बना दू तो इसकी क्या कीमत हो जायेगी?" बालक कुछ देर सोच कर बोला – "तब तो ये और महंगा बिकेगा लगभग 1000 रूपये का" पिताजी – "अगर मै इस ल...

मेंडक और गड्ढा

एक जंगल था। वहां कई सारे जीव जन्तु रहा करते थे। एक बार एक मेंढकों का झुंड जंगल के रास्ते से गुजर रहा था। रास्ते में एक गहरा गड्ढा था, अचानक दो मेंढक उस गड्ढे में गिर गये।  जब दूसरे मेंढकों ने देखा कि गढ्ढा बहुत गहरा है तो ऊपर खड़े सभी मेढक चिल्लाने लगे - ‘गढ्ढा बहुत गहरा है, तुम दोनों इस गढ्ढे से नहीं निकल सकते।' उन दोनों मेढकों ने ऊपर देखा लेकिन शायद ऊपर खड़े मेंढकों की बात नहीं सुन पा रहे थे। वे दोनों गड्ढे से निकलने बार बार उछल रहे थे मगर कामयाब नही हो पा रहे थे।  ऊपर खड़े मेंढक लगातार कहते रहे - ‘तुम दोनों बेकार में मेहनत कर रहे हो, तुम दोनों को उम्मीद छोड़ देनी चाहियें। तुम नहीं निकल सकते। गड्ढे में गिरे दोनों मेढकों में से एक मेंढक ने ऊपर खड़े मेंढकों की बात सुन ली और निराश होकर एक कोने में बैठ गया। दूसरे मेंढक ने प्रयास जारी रखा, वो जितना वो उछल सकता था, उछलता रहा। बहार खड़े सभी मेंढक लगातार कहते रहे - तुम नहीं निकाल सकते पर वो मेंढक शायद उनकी बात नहीं सुन पा रहा था। वो उछलता रहा और काफी कोशिशों के बाद आखिरकार वो बाहर आ गया।  दूसरे मेंढकों ने कहा - ‘क्या तुमहे हमारी बा...

बिल्ली और लोमड़ी

एक बार एक बिल्ली और एक लोमड़ी दोस्त थे वो दोनो एक बार शिकारी कुत्तों के बारे में चर्चा कर रही थीं। मुझे तो इन शिकारी कुत्तों से नफरत हो गयी है - लोमड़ी ने कहा। बिल्ली बोली - हां! मुझे भी।  आगे लोमड़ी नें कहा - मानती हूँ कि ये बहुत तेज दौड़ते है, पर मुझे पकड़ पाना इनके बस की बात नहीं। मैं इन कुत्तों से बचकर दूर निकल जाने के कई तरीके जानती हूँ। कौन-कौन से तरीके? बिल्ली ने जिज्ञासावश पूछा। लोमड़ी ने शेखी बघारते हुए कहा - कई तरीके हैं, कभी मैं काँटेदार झाडि़यों में से होकर दौड़ती हूँ तो कभी घनी झाडि़यों में छिप जाती हूँ। और कभी किसी माँद में घुस जाती हूँ। इन कुत्तों से बचनें के अनेक तरीको में से ये तो कुछ ही हैं। बिल्ली ने विन्रतापूर्वक कहा - मेरे पास तो सिर्फ एक ही अच्छा तरीका हैं। ओह! केवल एक ही तरीका? बहुत दुःख की बात है। खैर, मुझे भी तो बताओ वह तरीका? लोमड़ी ने पूछा। बताना क्या है, अब मैं उस तरीके पर अमल करनें जा रही हूँ। उधर देखो, शिकारी कुत्ते दौड़ते हुए आ रहे हैं। यह कहते हुए बिल्ली कूदकर एक पेड़ पर चढ़ गई।  अब कुत्ते उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते थे। शिकारी कुत्तों ने लोमडी़ क...

आलसी मेंडक

Boiled Frog | Motivational Story एक बार की बात है, एक गांव में तेज बरसात हुई और पानी के साथ काफी सारे मेंडक घरों के आसपास आ गए। वहीं पास में एक मेंडक ने घर के अंदर छलांग लगाई और एक बर्तन में जा गिरा। बर्तन के नीचे आग जल रही थी तो सब मैंडको ने आवाज़ लगाई कि छलांग लगा के पानी से बाहर आ जा। लेकिन वो आलसी था। उसके बाद पानी धीरे धीरे गर्म होता जा रहा था तो मेंढक पानी के तापमान के अनुसार अपने शरीर के तापमान को समायोजित कर लेता था।   जैसे जैसे पानी का तापमान बढ़ता जाता वैसे वैसे मेंढक अपने शरीर के तापमान को भी पानी के तापमान के अनुसार एडजस्ट करता जाता| लेकिन पानी के तापमान के एक तय सीमा से ऊपर हो जाने के बाद मेंढक अपने शरीर के तापमान को एडजस्ट करने में असमर्थ हो गया।  अब मेंढक स्वंय को पानी से बाहर निकालने की कोशिश करने लगा लेकिन वह अपने आप को पानी से बाहर नहीं निकाल पाया। वह पानी के बर्तन से एक छलांग में बाहर निकल सकता है लेकिन अब उसमें छलांग लगाने की शक्ति नहीं रही। क्योंकि उसने अपनी सारी शक्ति शरीर के तापमान को पानी के अनुसार एडजस्ट करने में लगा दी। आखिर में वह तड़प तड़प मर गया। शिक्...

शेर और खरगोश

एक घने जंगल में एक खतरनाक शेर रहता था। वह रोज एक जानवर का शिकार जरूर करता था। सभी जानवर उस शेर से घबराते थे। शेर रोज शिकार करता था इसलिए सभी जानवर बोहोत दुखी थे। सब जानवरों ने इस समस्या को हल करने के लिए एक मीटिंग रखी। सबने अपने अपने विचार रखें। सभी एक विचार पर सहमत हुए। सब ने तय किया कि शेर का भोजन बनके रोज एक प्राणी उसकी गुफा में जायेगा। यह बात शेर को बताई गई। शेर और अन्य प्राणियों के बीच समझौता हुआ।  अब शेर के भोजन के लिए रोज एक प्राणी को उसकी गुफा में जाना पड़ता था।  एक दिन एक खरगोश की बारी आई। उसे शेर के भोजन के समय तक उसकी गुफा में पहुँचना था।  खरगोश बहुत चतुर था। उसने शेर को खत्म करने की योजना बनाई। खरगोश जानबूझकर बहुत देर से शेर के पास पहुँचा। अब तक शेर के भोजन का समय बीत चुका था। उसे बहुत जोर की भूख लगी थी। इसलिए खरगोश पर उसे बहुत गुस्सा आया। ”तुमने आने में इतनी देर क्यो कर दी?“-  शेर ने गरजते हुए पूछा। खरगोश ने बहुत ही नम्रतापूर्वक जवाब दिया ”महराज, क्या करूँ रास्ते में एक दूसरा शेर मिल गया था। वह मेरा पीछा करने लगा। बहुत मुश्किल से मैं उससे पीछा छुड़ा...