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खुश रहने का राज | Happiness's Secret

एक समय एक गांव के पास एक पर्वत था। उस पर्वत में एक महान ऋषि रहा करते थे।

जब कभी किसी व्यक्ति को कोई समस्या होती थी तो वह व्यक्ति उन ऋषि के पास अपनी समस्या के समाधान के लिए जाते थे।

जो लोग उनके पास अपनी कठिनाईयां लेकर आते थे, वह ऋषि उनका मार्गदर्शन करते थे। 

एक दिन एक व्यक्ति उन ऋषि के पास आया। ऋषि ने उस व्यक्ति को बैठने के लिए कहा।

 नीचे बैठने के बाद उस व्यक्ति ने ऋषि से एक प्रश्न पूछा। 
उसने पूछा - “गुरुदेव मैं यह जानना चाहता हुईं कि हमेशा खुश रहने का राज़ क्या है?” 

ऋषि ने उस व्यक्ति कि तरफ देखा और उससे कहा - "यहीं पास में जंगल है, तुम मेरे साथ जंगल में चलो, मैं तुम्हे वहीं पर खुश रहने का राज़ बताऊंगा।"

ऐसा कहकर ऋषि और वह व्यक्ति जंगल की तरफ चलने लगे। 

रास्ते में ऋषि ने एक बड़ा सा पत्थर देखा और उस व्यक्ति को कहा - "इस पत्थर को साथ ले चलो" 

उस व्यक्ति ने पत्थर को उठाया और वह ऋषि के साथ साथ जंगल की तरफ चलने लगा

वह आगे बढ़ते जा रहे थे। थोड़े समय बाद उस व्यक्ति के हाथ में दर्द होने लगा लेकिन वह चुप रहा और चलता रहा। 

परन्तु जब चलते चलते बहुत समय बीत गया और उस व्यक्ति से दर्द सहा नहीं गया तो उसने ऋषि से कहा कि उसे दर्द हो रहा है।

ऋषि ने कहा - "इस पत्थर को नीचे रख दो। पत्थर को नीचे रखने पर उस व्यक्ति को बड़ी राहत महसूस हुयी।"

ऋषि ने पूछा - "अब कैसा लग रहा है"

व्यक्ति ने प्रसन्न हो कर कहा - "गुरुवर! अब मुझे अच्छा लग रहा है।"

तभी ऋषि ने कहा – “यही है खुश रहने का राज़”| 

व्यक्ति ने कहा – गुरुवर मैं समझा नहीं।

तो ऋषि ने कहा- जिस तरह इस पत्थर को दो मिनट तक हाथ में रखने पर थोडा सा दर्द होता है और अगर इसे एक घंटे तक हाथ में रखें तो थोडा ज्यादा दर्द होता है और अगर इसे और ज्यादा समय तक उठाये रखेंगे तो दर्द बढ़ता जायेगा।

ऋषि ने आगे कहा - इस तरह दुखों के बोझ को जितने ज्यादा समय तक उठाये रखेंगे उतने ही ज्यादा हम दु:खी और निराश रहेंगे। यह हम पर निर्भर करता है कि हम दुखों के बोझ को एक मिनट तक उठाये रखते है या उसे जिंदगी भर। अगर तुम खुश रहना चाहते हो तो दु:ख रुपी पत्थर को जल्दी से जल्दी नीचे रखना सीख लो और हो सके तो उसे उठाओ ही नहीं"

उस व्यक्ति को ऋषि की बात समझ आई और वह खुशी-खुशी अपने घर चला गया।

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