एक गांव में राजू नाम का एक लड़का था वह अपनी मां और छोटी बहन के साथ रहता था। वो रोज आसपास की बकरियां चराने जंगल में एक पर्वत के पास जाता था। वहां एक विशाल पेड़ था। राजू उस पेड़ की छांव में गाना गाता था इसलिए वहां के सभी पंछियों संग उसकी अच्छी दोस्ती हो गई थी। वो सारी भेड़ बकरियों पर नजर भी रखता था। शाम होते ही राजू वापस अपने गांव आ कर सभी भेड़ बकरियों को अपने अपने मालिकों को सौंप देता था। दिनभर भेड़ बकरियों की देखभाल करने के लिए सभी लोगों से उसे कुछ पैसे मिलते थे। इन पैसों से राजू और उसके परिवार का घर चलता था। इन पैसों से राजू के परिवार को खाना मिल जाया करता था लेकिन कभी-कभी उसकी छोटी बहन को और अच्छा खाना खाने का मन करता था। वो हर दिन रुखा सुखा खा कर बोर गई थी। यह बात राजू समझता था पर कर भी क्या सकता था? वो चाहता था कि उसकी बहन अच्छी पढ़ाई करें इसलिए वो पैसे जोड़ता था। अगले दिन जब राजू भेड़ बकरियां चराने जंगल में पहुंचा तो उसने देखा कि एक लकड़हारा उस पेड़ को काट रहा था जिसके नीचे बैठकर राजू अपनी बकरियों को चराया करता था। यह देख कर रहे बहुत दुखी हुआ। वह सोचने लगा कि क्या किया जाए तभ...