प्रतापनगर एक बहुत ही संपन्न राज्य था। वहाँ के राजा बहुत ही प्रतापी थे और प्रजा का पूरा ख्याल रखते थे। राजा ने पूरे जीवन प्रजा की मन से सेवा की थी लेकिन अब वह बूढ़े हो चले थे तो मन में बड़ी दुविधा थी कि उनके बाद राज्य को कौन चलाएगा? राजा साहब के 3 बेटे थे। अब तीनों ने एक ही गुरु और एक ही विद्यालय से शिक्षा ली थी लेकिन राजा ये निर्णय नहीं कर पा रहे थे कि कौन राज्य के लिए सबसे अच्छा उत्तराधिकारी है। अब राजा ने तीनों बेटों की परीक्षा लेने की सोची। एक दिन राजा ने सुबह सुबह सभी पुत्रों को बुलाया और उन सबको एक एक बोरी गेहूं देते हुए कहा कि मैं और तुम्हारी माता तीर्थ यात्रा पर जा रहे हैं। हमें वापस आने में एक वर्ष से भी ज्यादा लग सकता है। तुम तीनों की ये जिम्मेदारी है कि अपने हिस्से के गेहूं को संभाल के रखना और जब मैं वापस लौटूं तो तुमको ये गेहूं की बोरी वापस लौटानी है। ऐसा कहकर राजा और रानी तीर्थ यात्रा पर चल दिए। सबसे बड़े बेटे से सोचा ये गेहूं की बोरी पिताजी को वापस लौटानी है तो इसे मैं तिजोरी में बंद कर देता हूँ। जब पिताजी आएंगे तो वापस दे दूंगा। यही सोचकर उसने गेहूं की बोरी तिजोरी में रखवा द...