एक गांव में राजू नाम का एक लड़का था वह अपनी मां और छोटी बहन के साथ रहता था।
वो रोज आसपास की बकरियां चराने जंगल में एक पर्वत के पास जाता था। वहां एक विशाल पेड़ था। राजू उस पेड़ की छांव में गाना गाता था इसलिए वहां के सभी पंछियों संग उसकी अच्छी दोस्ती हो गई थी। वो सारी भेड़ बकरियों पर नजर भी रखता था।
शाम होते ही राजू वापस अपने गांव आ कर सभी भेड़ बकरियों को अपने अपने मालिकों को सौंप देता था।
दिनभर भेड़ बकरियों की देखभाल करने के लिए सभी लोगों से उसे कुछ पैसे मिलते थे। इन पैसों से राजू और उसके परिवार का घर चलता था।
इन पैसों से राजू के परिवार को खाना मिल जाया करता था लेकिन कभी-कभी उसकी छोटी बहन को और अच्छा खाना खाने का मन करता था। वो हर दिन रुखा सुखा खा कर बोर गई थी।
यह बात राजू समझता था पर कर भी क्या सकता था? वो चाहता था कि उसकी बहन अच्छी पढ़ाई करें इसलिए वो पैसे जोड़ता था।
अगले दिन जब राजू भेड़ बकरियां चराने जंगल में पहुंचा तो उसने देखा कि एक लकड़हारा उस पेड़ को काट रहा था जिसके नीचे बैठकर राजू अपनी बकरियों को चराया करता था।
यह देख कर रहे बहुत दुखी हुआ। वह सोचने लगा कि क्या किया जाए तभी अचानक उसे एक तरकीब सूझी।
उसने लकड़हारे से कहा - सुनो! आप पेड़ को क्यों काट रहे हो? शायद आपको पता नहीं है कि इस पेड़ के अंदर एक चुड़ैल रहती है। जो कोई भी इस पेड़ को काटेगा तो वह चुड़ैल उसके पीछे पड़ जाएगी और उसको परेशान करेगी।
यह सुनकर लकड़हारा डर गया और भागने लगा।
लकड़हारे के जाने के बाद उस पेड़ में से एक आवाज आई - तुमने मेरी जान बचाई है और मैं इससे बहुत खुश हूं इसलिए मैं तुम्हें उपहार के तौर पर एक घंटी देना चाहता हूं।
राजू ने कहा - भला मैं घंटी का क्या करूंगा?
पेड़ नहीं जवाब दिया - यह कोई ऐसी वैसी घंटी नहीं है। यह एक जादुई घंटी है और इससे तुम जो चाहे वह खाने के लिए मंगा सकते हो।
राजू हैरान हुआ।
पेड़ में आगे कहा - बस एक बात का ध्यान रखना इस घंटी से तुम दिन में सिर्फ एक बार ही खाना मंगा सकते हो।
राजू बहुत खुश हुआ और सोचने लगा कि अब मैं अपनी छोटी बहन के लिए जो चाहे वह खाने के लिए मना सकता हूं।
राजू जब शाम को घर पहुंचा तो उसने अपनी मां और छोटी बहन को सारी बात बताई। उसकी मां और बहन बहुत खुश हुए।
राजू ने शाम को खाने के वक्त उस जादुई घंटी से विनती कि और जो चाहिए था वह मंगवा कर जी भर खाया और सो गए।
अगली सुबह उठकर राजू भेड़ बकरियों को लेकर चला गया। जब शाम को आकर उसने देखा तो घर पर सभी बर्तन खाली पड़े थे। उसके लिए बस रूखी सूखी रोटी और चटनी है जो वह रोज खाया करता था।
यह देखकर राजू को बहुत दुख हुआ और गुस्सा भी आया। उसने कुछ नहीं खाया और सो गया।
अगली सुबह वह अपने साथ जादुई घंटी को ले गया।
बाद में जब राजू की मां और उसकी छोटी बहन को भूख लगी तो उन दोनों ने उस जादुई घंटी को खूब ढूंढा पर उनको वह घंटी नहीं मिली। वह दोनों बहुत दुखी हुए और भूखे ही सो गए।
शाम को जब राजू घर वापस आया तो उसने उस जादुई घंटी से जो चाहिए था वह मंगाया और खूब खाया।
यह सब देख कर राजू की मां और उसकी छोटी बहन को बहुत दुख हुआ।
छोटी बहन बहुत रोने लगी और उसने कहा - भाई आप बहुत स्वार्थी हो गए हैं आप पहले ऐसे नहीं थे।
राजू को यह सुनकर बहुत दुख हुआ। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ।
राजू ने कहा - कल जब मैं घर लौटा तो मुझे खाने के लिए कुछ भी अच्छा नहीं मिला।
कल आपने जादुई घंटी से खाना तो मंगाया लेकिन आप मेरे लिए खाना बचाना भूल गए और मैं थक कर भूखे पेट ही सो गया।
इस बात से मुझे बहुत दुख हुआ और मुझे गुस्सा भी आ गया इसलिए मैं यह घंटी अपने साथ ले गया। मैं और करता भी क्या?
यह सुनकर राजू की बहन को भी अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने राजू से माफी मांगी।
फिर सबने मिल बांटकर खाना खाया।
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