Boiled Frog | Motivational Story
एक बार की बात है, एक गांव में तेज बरसात हुई और पानी के साथ काफी सारे मेंडक घरों के आसपास आ गए।
वहीं पास में एक मेंडक ने घर के अंदर
छलांग लगाई और एक बर्तन में जा गिरा।
बर्तन के नीचे आग जल रही थी तो सब मैंडको ने आवाज़ लगाई कि छलांग लगा के पानी से बाहर आ जा। लेकिन वो आलसी था।
उसके बाद पानी धीरे धीरे गर्म होता जा रहा था तो मेंढक पानी के तापमान के अनुसार अपने शरीर के तापमान को समायोजित कर लेता था।
जैसे जैसे पानी का तापमान बढ़ता जाता वैसे वैसे मेंढक अपने शरीर के तापमान को भी पानी के तापमान के अनुसार एडजस्ट करता जाता|
लेकिन पानी के तापमान के एक तय सीमा से ऊपर हो जाने के बाद मेंढक अपने शरीर के तापमान को एडजस्ट करने में असमर्थ हो गया।
अब मेंढक स्वंय को पानी से बाहर निकालने की कोशिश करने लगा लेकिन वह अपने आप को पानी से बाहर नहीं निकाल पाया।
वह पानी के बर्तन से एक छलांग में बाहर निकल सकता है लेकिन अब उसमें छलांग लगाने की शक्ति नहीं रही।
क्योंकि उसने अपनी सारी शक्ति शरीर के तापमान को पानी के अनुसार एडजस्ट करने में लगा दी।
आखिर में वह तड़प तड़प मर गया।
शिक्षा:
मेंढक की मृत्यु गर्म पानी के कारण नहीं होती हुई, सच यह है कि मेंढक की मौत सही समय पर पानी से बाहर न निकलने की वजह से होती है।
अगर मेंढक शुरू में ही पानी से बाहर निकलने का प्रयास करता तो वह आसानी से बाहर निकल सकता था|
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हम सही समय पर निर्णय नहीं लेते हैं तो हमें अपनी ही गलतियों कि वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ेगा और हम धीरे-धीरे कमजोर होते जाएंगे।
फिर हम इतने कमजोर पड़ सकते हैं कि हम उस परिस्थिति के आदि हो जाए और फिर कभी उससे निकल ही न पाएं|
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