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खुश रहने का राज | Happiness's Secret

एक समय एक गांव के पास एक पर्वत था। उस पर्वत में एक महान ऋषि रहा करते थे। जब कभी किसी व्यक्ति को कोई समस्या होती थी तो वह व्यक्ति उन ऋषि के पास अपनी समस्या के समाधान के लिए जाते थे। जो लोग उनके पास अपनी कठिनाईयां लेकर आते थे, वह ऋषि उनका मार्गदर्शन करते थे।  एक दिन एक व्यक्ति उन ऋषि के पास आया। ऋषि ने उस व्यक्ति को बैठने के लिए कहा।  नीचे बैठने के बाद उस व्यक्ति ने ऋषि से एक प्रश्न पूछा।  उसने पूछा - “गुरुदेव मैं यह जानना चाहता हुईं कि हमेशा खुश रहने का राज़ क्या है?”  ऋषि ने उस व्यक्ति कि तरफ देखा और उससे कहा - "यहीं पास में जंगल है, तुम मेरे साथ जंगल में चलो, मैं तुम्हे वहीं पर खुश रहने का राज़ बताऊंगा।" ऐसा कहकर ऋषि और वह व्यक्ति जंगल की तरफ चलने लगे।  रास्ते में ऋषि ने एक बड़ा सा पत्थर देखा और उस व्यक्ति को कहा - "इस पत्थर को साथ ले चलो"  उस व्यक्ति ने पत्थर को उठाया और वह ऋषि के साथ साथ जंगल की तरफ चलने लगा वह आगे बढ़ते जा रहे थे। थोड़े समय बाद उस व्यक्ति के हाथ में दर्द होने लगा लेकिन वह चुप रहा और चलता रहा।  परन्तु जब चलते चलते बहुत समय ...

दो सिर वाला पक्षी

एक बार की बात है, एक समय में एक विचित्र पक्षी रहता था। उसका शरीर एक ही था, लेकिन सिर दो थे। एक शरीर होने के बावजूद उसके दोनों सिरों में एकता नहीं थी और न ही तालमेल था।  वे एक दूसरे से बैर रखते थे। हर जीव सोचने समझने का काम दिमाग से करता ही हैं लेकिन दो सिर होने के कारण उसके दिमाग भी दो थे।  दोनों सर में से एक पूरब जाने की सोचता तो दूसरा पश्चिम। और होता यह था कि टांगें एक कदम पूरब की ओर चलती तो अगला कदम पश्चिम की ओर। वह स्वयं को वहीं खडा पाता था। उसका जीवन बस दो सिरों के बीच की लड़ाई बनकर रह गया था। एक दिन वह भोजन की तलाश में नदी तट पर धूम रहा था कि एक सिर को नीचे गिरा एक फल नजर आया। उसने चोंच मारकर उसे चखकर देखा तो जीभ चटकाने लगा “वाह! ऐसा स्वादिष्ट फल तो मैंने आज तक कभी नहीं खाया। भगवान ने दुनिया में क्या-क्या चीजें बनाई हैं।” “अच्छा! जरा मैं भी चखकर देखूं।” कहकर दूसरे ने अपनी चोंच उस फल की ओर बढाई ही थी कि पहले सिर ने झटककर दूसरे सिर को दूर फेंका और बोला “अपनी गंदी चोंच इस फल से दूर ही रख। यह फल मैंने पाया हैं और इसे मैं ही खाऊंगा।” “अरे! हम दोनों का शरीर तो एक ह...

दूध का कुआ

बादशाह अकबर के दरबार की कार्यवाही चल रही थी। सभी दरबारी एक ऐसे प्रश्न पर विचार कर रहे थे जो राज-काज चलाने की दृष्टि से बेहद अहम नहीं था।  सभी एक-एक कर अपनी राय दे रहे थे। बादशाह दरबार में बैठे यह महसूस कर रहे थे कि सबकी राय अलग है। उन्हें आश्चर्य हुआ कि सभी एक जैसे क्यों नहीं सोचते! तब अकबर ने बीरबल से पूछा, “क्या तुम बता सकते हो कि लोगों की राय आपस में मिलती क्यों नहीं ? सब अलग-अलग क्यों सोचते हैं ?” “हमेशा ऐसा नहीं होता, बादशाह सलामत !” बीरबल बोला, “कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं जिन पर सभी के विचार समान होते हैं।”  इसके बाद कुछ और काम निपटा कर दरबार की कार्यवाही समाप्त हो गई। सभी अपने-अपने घरों को लौट चले। उसी शाम जब बीरबल और अकबर बाग में टहल रहे थे तो बादशाह ने फिर वही राग छेड़ दिया और बीरबल से बहस करने लगे। तब बीरबल बाग के ही एक कोने की ओर उंगली से संकेत करता हुआ बोला, “वहां उस पेड़ के निकट एक कुआं है। वहां चलिए, मैं कोशिश करता हूं कि आपको समझा सकूं कि जब कोई समस्या जनता से जुड़ी हो तो सभी एक जैसा ही सोचते हैं। मेरे कहने का मतलब यह है कि बहुत सी ऐसी बातें हैं जिनको...

चार चोरों की कहानी । बुरे का अंत बुरा

किसी जंगल में चार चोर रहते थे। वे चारों मिलकर चोरी किया करते थे। जो भी सामान उनके हाथ लगता था वह उसे आपस में बराबर-बराबर बाँट लेते थे।  वैसे तो वे चारों एक-दूसरे के प्रति प्रेम प्रकट करते थे, किन्तु मन-ही-मन एक-दूसरे से ईर्ष्या करते थे। चारों चोर बहुत ही दुष्ट और स्वार्थी प्रवृत्ति के थे। वे चारों अपने मन में यही सोचते थे कि यदि किसी दिन बड़ी चोरी करेंगे और एक बार मोटा माल मिल जाए तो वह अपने साथियों को मारकर सारा माल हड़प लेगा।  चारों चोर इस ही मौक़े की तलाश में थे। लेकिन उन्हें ऐसा मौका अभी तक नहीं मिला था। एक रात चारों चोर चोरी करने के लिए इधर-उधर घूम रहे थे। उन्होंने एक अमीर सेठ के घर में सेंध लगाई और घर के अन्दर घुसकर हीरे-जवाहरात, सोना-चाँदी, रूपया-पैसा सब कुछ लूटकर भाग गए।  चारों चोर पुलिस से बचने के लिए दो दिन तक जंगल में भूखे-प्यासे भटकते रहे। सेठ ने चोरी की शिकायत पुलिस में दर्ज करा दी थी। सेठ की पुलिस विभाग में भी अच्छी जान-पहचान थी।  चोरों को पकड़ने के लिए शहर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस फैली हुई थी। जंगल से निकलना चोरों के लिए खतरे से खाली नहीं था...

राजू और जादुई माचिस

राजू और चिंकी अच्छे दोस्त थे वह एक ही स्कूल में पढ़ा करते थे। एक दिन स्कूल की छुट्टी हुई। सब बाहर जाने लगे।  राजू परेशान सा दिख रहा था तो चिंकी ने कारण पूछा। राजू ने घबराते हुए बताया - “अगले हफ्ते से एग्जाम हैं, डर लग रहा है।”  यह सुनकर चिंकी हंस पड़ी- “लगता है, तुम एग्जामोफोबिया के शिकार हो गए हो। मंथली टेस्ट में भी तुम ऐसे ही डरे हुए थे। मार्क्स तो अच्छे ही आए थे तुम्हारे। फिर डर कैसा?”  रमेश ने चिढ़ाते हुए कहा, “यह ऐसा ही है। जब कभी हम स्कूल के लिए थोड़ा लेट हो जाते हैं, तब भी यह ऐसा ही घबरा जाता है। इसका कुछ नहीं हो सकता।”  एक के बाद एक सारे दोस्त राजू को चिढ़ाने लगे, तो चिंकी ने बात बदलते हुए कहा, “बहुत हो गया। तुम सब इसे सपोर्ट करने की जगह इसका मजाक उड़ा रहे हो। अच्छे दोस्त ऐसा नहीं करते।”  दूसरे दिन स्कूल में लंच ब्रेक हुआ, तो बच्चे मस्ती करने लगे। राजू चुपचाप एक कोने में अकेला बैठा था। चिंकी ने पूछा, तो राजू ने कहा, “एग्जाम डेट सुनने के बाद से मेरा तो खाने का मन ही नहीं है। मुझे तो आज रात नींद भी नहीं आएगी।”  चिंकी पहले तो मुसकराई, फिर धीरे से बोली,...

सबसे बड़ा गरीब कौन?

एक महात्मा भिक्षु भ्रमण करते हुए नगर में से गुज़र रहे थे। मार्ग में उन्हें एक रुपया मिला।  महात्मा तो विरक्त और संतोषी व्यक्ति थे। वे भला उसका क्या करते?  अतः उन्होंने किसी गरीब या दरिद्र को यह रुपया देने का विचार किया।  वे कई दिन तक तलाश करते रहे लेकिन उन्हें कोई दरिद्र नहीं मिला। एक दिन उन्होंने देखा कि एक राजा अपनी सेना सहित दूसरे राज्य पर चढ़ाई करने जा रहा है।  साधु महात्मा ने वह रुपया राजा के ऊपर फेंक दिया।  इस पर राजा को नाराजगी भी हुई और साथ ही साथ आश्चर्य भी हुआ क्योंकि रुपया एक साधु ने फेंका था। राजा ने साधु से ऐसा करने का कारण पूछा। साधु ने धैर्य के साथ कहा- ‘राजन्! मैंने रास्ते में एक रुपया पाया, उसे किसी दरिद्र को देने का निश्चय किया। लेकिन मुझे तुम्हारे बराबर कोई दरिद्र व्यक्ति नहीं मिला, क्योंकि जो इतने बड़े राज्य का अधिपति होकर भी दूसरे राज्य पर चढ़ाई करने जा रहा हो और इसके लिए युद्ध में अपार संहार करने को उद्यत हो रहा हो, उससे ज्यादा दरिद्र कौन होगा?’ राजा का क्रोध शान्त हुआ और अपनी भूल पर पश्चात्ताप हुआ।  यूज राजा ने अपनी सेना पीछे ली और वा...

बंदरों की भेड़चाल | The monkeys experiment

एक बार कुछ बंदरों को एक बड़े से पिंजरे में डाला गया और वहां पर एक सीढी लगाई गई। सीढी के ऊपरी भाग पर कुछ केले लटका दिए गए। उन केलों को खाने के लिए एक बन्दर सीढी के पास पहुंचा। जैसे ही वह बन्दर सीढी पर चढ़ने लगा, उस पर बहुत सारा ठंडा पानी गिरा दिया गया और उसके साथ-साथ बाकी बंदरों पर भी पानी गिरा दिया गया। पानी डालने पर वह बन्दर भाग कर एक कोने में चला गया। थोड़ी देर बाद एक दूसरा बन्दर सीढी के पास पहुंचा। वह जैसे ही सीढी के ऊपर चढ़ने लगा, फिर से बन्दर पर ठंडा पानी गिरा दिया गया और इसकी सजा बाकि बंदरों को भी मिली और साथ-साथ दूसरे बंदरो पर भी ठंडा पानी गिरा दिया गया। ठन्डे पानी के कारण सारे बन्दर भाग कर एक कोने में चले गए। यह प्रक्रिया चलती रही और जैसे ही कोई बन्दर सीढी पर केले खाने के लिए चढ़ता, उस पर और साथ-साथ बाकि बंदरों को इसकी सजा मिलती और उन पर ठंडा पानी डाल दिया जाता। बहुत बार ठन्डे पानी की सजा मिलने पर बन्दर समझ गए कि अगर कोई भी उस सीढी पर चढ़ने की कोशिश करेगा तो इसकी सजा सभी को मिलेगी और उन सभी पर ठंडा पानी डाल दिया जाएगा। अब जैसे ही कोई बन्दर सीढी के पास जाने की कोशिश करता तो बाकी सारे ...