एक बार एक चीकू नाम का खरगोश था। एक दिन वह अपनी पत्नी के साथ बाग में धूम रहा था।
जब उसकी पत्नी ने पेड़ पर मीठे-मीठे फल लटके देखे तो उसके मुँह में पानी आ गया उसने चीकू से फल तोड़कर लाने को कहा।
इस पर चीकू ने कहा कि यह बाग एक भेड़िये का है जो बहुत ही खूँखार है। अगर उसे पता चल गया कि हमने फल तोड़े है तो वह हम दोनों को मार कर खा जायेगा।
परन्तु चीकू की पत्नी उसके समझाने पर भी ना मानी हारकर चीकू को फल तोड़ने जाना पड़ा।
चीकू ने जैसे ही फल तोड़ने शुरू करे, वहाँ भेड़िया आ गया। चीकू फौरन फल लेकर भगा और पास पड़े एक ड्रम में घुस गया और उस ड्रम में फल रखकर बाहर आकर चुपचाप खड़ा हो गया।
तभी भेड़िया वहाँ आ गया और उसने चीकू से पूछा कि क्या उसने किसी खरगोश को वहाँ से फल ले जाते हुए देखा है।
चीकू फौरन समझ गया कि भेड़िये ने उसे पहचाना नहीं । उसने भेड़िये से कहा कि अभी-अभी एक खरगोश को मैने इस ड्रम में घूसते हुए देखा है । उसके पास बहुत से फल थे।
भेड़िया ड्रम के पास गया तो उसे उसमें से फलों की खुशबू आ रही थी। भेड़िया खरगोश को मारने के लिए उस ड्रम में घूस गया।
चालाक चीकू के फटाफट ड्रम का ढकन बंद कर दिया । भेड़िया ड्रम के अन्दर ही मर गया।
चीकू और उसकी पत्नी उस बाग के मालिक बन गए ।
इस तरह चीकू ने अपनी बुद्धि से न सिर्फ अपनी जान बचायी बल्कि उस बाग का मालिक भी बन गया।
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